चुनावी तमाशा …


“गूँगे” ने मचाया इतना शोर,
कि दुनिया अब,
“बड़बोले” को चुनने चली !

“ढैंचू ढैंचू” से हुई इतनी बोर,
कि दुनिया अब,
“मैं मैं” को चुनने चली !

“ठाकुर” तो निकला बेबस़ और कमज़ोर,
कि दुनिया अब,
“गब्बर” को चुनने चली !

“Secularism का बुर्खा़” पहनने वाले तो निकले चोर,
कि दुनिया अब,
“मौत के सौदागर” को चुनने चली !

“ठीक है” से नहीं चलेगा, India मांगे More,
कि दुनिया अब,
“Act” नहीं “Action” को चुनने चली !

एै “धृतराष्ट”, तू अब तो गद्दी छोड़,
कि दुनिया अब,
“औरंगजे़ब” को चुनने चली !

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