“राम बिना दीवाली…”


What if, Lord Rama doesn’t reach Ayodhya during Diwali ?
What if, Raavan, under the garb of Lord Rama, entices Ayodhya ?

With my distopian gaze, penned down few lines, on the current socio-political scenario.

दशहरा में रावण का पुतला जलाया,
दीवाली में दियों का अम्बार लगाया,
पर किसको पता था, की अबकी बार,
पुष्पक से, कुबेर संग, राम भेस में,
दशानन रावण आया ।

सोने की लंका का अरमान सजाया,
मिथकीय बौद्धिकता तोड़, भौतिकता अपनाया,
मायावी रावण के राम-राज्य में,
अयोध्या ने बिन राम ही, त्योहार मनाया ।

मंथरा की फुसफुसाहट को,
सर्व्यापी शोर बनाया,
करुणामयी सिया को भूल,
श्री राम का हुंकार लगाया,
फिर लक्ष्मनी क्रोध,
और हनुमानी गदा से,
घर-घर अहंकारी प्रसाद बंटवाया ।

केवट को मैली सरयू में डुबाया,
वंशवादी भरत को अयोग्य बताया,
शबरी को अजाति कर, प्रशासन ने,
वाल्मीकि को भी नक्सली ठहराया ।

ये सब देख, अब जनक भी घबराया,
सर्वस्पर्शी राम को तार भिजवाया,
सुना है, सीता संग, वो पैदल ही आएंगे,
इस बार, फिर से 14 साल लगे, तो भी क्या,
संजीवनी ढूंढ, मूर्च्छित अयोध्या को जगाने
हम सबके, सच के राम आएंगे ।

#politics #india #poornaviraam #hindi #kavita

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