My ism…


भगवान को, इंसान समझने वाले,
और खुद, भगवान बनाने वाले,
तुम हो क्या ?

ऊबरो इन धर्मिक मलबों से,
और छील दो, ये जमी मैली कचरी,
फिर धो डालो ख़ुदको, छोड़के,
अपनी कृत्रिम देशज छतरी !

नोंच लो आंखे जिनसे,
देखते हो, नस्लों में रंग,
उधेड़ दो, सालों से जमा किये,
ये क्षेत्रीय ढंग,
फाड़ दो, किताबी लेखा-झोखा,
झाड़ दो, अमीरी ग़रीबी का हिसाब,
अंत में जो रह जाएगा,
छील दो, उसे भी खुद से,
ख़ासकर, वो लिंगभेदी लिबास !

अपने हर संस्करण से पिछले,
सामाजिक वर्गीकरण के पहले के, ऐ नवजात,
सृजन करो नव विचार, संस्कार और व्यवहार,
इस प्रकृति से जन्मे, हर सजीव निर्जीव के समान !

क्योंकि, तुम हो क्या ?
इस धरती, संसार, भ्रह्माण्ड के पार,
एक सूक्ष्म, महीन, नगन्य हमवार !

#poornaviraam

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