नायक…


These 3 lines are shared on social media post JNU controversy and Kanhaiya Kumar’s speech.
“एक नारे से, एक भाषण से …
एक धरने से भी नायक बन सकते थे ..
दीवाने थे जो, सरहद पे ख़ून बहा दिया!”

Below is my humble attempt to elaborate it further !

एक नारे से, एक भाषण से …
एक धरने से भी नायक बन सकते थे ..
दीवाने थे जो, सरहद पे ख़ून बहा दिया!

कुछ धोखे से, कुछ अंकों से …
कुछ दंगों से भी नायक बन सकते थे …
दीवाने थे जो, अनेकवाद का पाठ याद किया!

कुछ शोर से, कुछ ज़ोर से …
कुछ जुमलों से भी नायक बन सकते थे …
दीवाने थे जो, विनम्रता से सर झुका के काम किया!

कुछ पूंजी-पतियों में, कुछ धर्म-गुरुओं में …
कुछ आपस में बाँट के भी, नायक बन सकते थे …
दीवाने थे जो, ज़मींदारों के खेतों में हल चला दिया!

कुछ “कुल” के नाम से, कुछ “रघु” के नाम से …
कुछ फर्ज़ी ज्ञान से भी नायक बन सकते थे …
दीवाने थे जो, शिक्षा-अर्जन में समय बर्बाद किया!

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